नोट छापने का तरीका/ मशीन- Note Chapne ka Tarika

जाने - नोट छापने का तरीका, पैसा छापने की मशीन, जाली / नकली नोट बनाने की विधि से बचें !


नोट छापने का तरीका----
नोट को देखकर सबको जानने की ईच्छा तो होती ही है कि जिस नोट के बिना हमारा एक दिन भी गुजारा नही  हो सकता,उसको कैसे छापा जाता है और कहाँ छपता है। आइये आपको अवगत करवाते है कि भारतीय मुद्रा के नोट छापने की मशीन कहाँ-कहाँ है और छपाई का कागज और स्याही कहाँ से आती है।और किस तरह नोट छपकर हम तक पहुंचते है।

नीचे दी गई वीडियो को ध्यान से देखें क्योंकि ये महत्त्वपूर्ण टिप्स है |

वीडियो पूरा देखें (सब कुछ अंत तक देखें) Click Below Video- 

 




नोट छापने की मशीन देश के किस कोने में है-----------
भारत में नोट छापने  की मशीन भारत के मध्य  में चार जगहों पर स्थापित की गयी है।  मध्यप्रदेश के देवास,महाराष्ट्र नासिक ,पश्चिमी बंगाल के सालबोनी और कर्नाटक के मैसूर नामक स्थान पर नोट छापने की मशीन स्थापित की गयी है।

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करेंसी प्रेस नोट देवास (मध्यप्रदेश)----
                               मध्यप्रदेश के देवास  नामक स्थान पर करेंसी प्रेस नोट देवास प्रेस है जहाँ पर तक़रीबन 265 करोड़ नोट की छपाई प्रति वर्ष की जाती है। यहाँ पर छपने वाले नोटों के लिए स्याही देवास में ही बैंकनोट प्रेस में बनाई जाती है।  देवास में 20,50,100 और 500 के नोट छापे जाते रहे है।


करेंसी प्रेस नोट नासिक (महाराष्ट्र)---
                                                      महाराष्ट्र के नासिक नामक स्थान पर करेंसी प्रेस नोट नासिक प्रेस है जहाँ पर 1,2,5.50 और 100 के नोट की छपाई की जाती है। पहले नासिक प्रेस में केवल 50 और 100 के नोट की ही छपाई होती थी किन्तु सन 1991 से नासिक प्रेस में 1,2,और 5 के नोट की छपाई भी शुरू कर दी गयी।


करेंसी प्रेस नोट मैसूर (कर्नाटक)----
                                                      कर्नाटक के मैसूर नामक स्थान पर करेंसी प्रेस नोट मैसूर है जोकि 3 फरवरी 1995 को स्थापित की गयी थी।  यह प्रेस  मांग और पूर्ति को पूरा करने के लिए स्थापित की गयी थी।  मैसूर में 1000 के नोटों की छपाई की जाती थी। मैसूर और सालबोनी दोनों प्रेस मिलकर 16 अरब नोटों की छपाई प्रति वर्ष करती है।

करेंसी प्रेस नोट सालबोनी (पश्चिमी बंगाल)----
                                                                   पश्चिमी बंगाल के सालबोनी नामक स्थान पर करेंसी प्रेस नोट सालबोनी है जो मैसूर साथ मिलकर नोटों का उत्पादन बढ़ाती है ताकि मांग की पूर्ति बिना किसी देरी के पूरी की जा सके।

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कहाँ  से आता है पेपर --नोटों की छपाई के लिए-----

मध्य प्रदेश में होशंगाबाद नामक स्थान पर सिक्यॉरिटी पेपर मिल है,यहाँ पर छपा पेपर नोट छपाई में प्रयोग किया जाता है।  नोट छपाई पेपर या तो होशंगाबाद से आता है या फिर विदेश से आते हैं।  कॉटन और कॉटन के रेशे मिश्रित एक वॉटरमार्क पेपर पर  भी नोट की छपाई की जाती है। विदेश में नोट छापने का पेपर सिर्फ चार जगह पर ही बनाया जाता है,जो निम्नलिखित है----
1.  फ्रांस की अर्जो विगिज
2. अमेरिका का पोर्टल
3. स्वीडन का गेन
4. पेपर फैब्रिक्स ल्युसेंटल
जबकि सिक्के ढालने की टकसाल भारत में निम्नलिखित चार जगह पर स्थापित की गयी है----
1. मुंबई
2.  हैदराबाद
3. कोलकाता
4.  नोएडा


 नोट छापने की स्याही---

बैंक नोट की संख्या चमकीली स्याही से मुद्रित होती है। बैंक नोट में चमकीले रेशे होते हैं। अल्ट्रावायलेट रोशनी में देखे जा सकते हैं। कॉटन और कॉटन के रेशे मिश्रित एक वॉटरमार्क पेपर पर नोट मुद्रित किया जाता है। - See more at: http://www.jagran.com/news/oddnews-do-you-know-how-to-make-rupee-14422114.html#sthash.JURF5hxJ.dpuf
बैंक नोट की संख्या चमकीली स्याही से मुद्रित होती है। बैंक नोट में चमकीले रेशे होते हैं। अल्ट्रावायलेट रोशनी में देखे जा सकते हैं। कॉटन और कॉटन के रेशे मिश्रित एक वॉटरमार्क पेपर पर नोट मुद्रित किया जाता है। - See more at: http://www.jagran.com/news/oddnews-do-you-know-how-to-make-rupee-14422114.html#sthash.JURF5hxJ.dpuf
नोट छपाई में ऑफसेट स्याही का प्रयोग किया जाता है।  ऑफसेट स्याही मध्यप्रदेश के देवास नामक स्थान पर बैंकनोट प्रेस में बनाई जाती है।नोट छपाई के लिए ज्यादातर स्याही जर्मनी की जीएस्की एंड डेवरेंट या ब्रिटेन की देलारू कंपनी से मंगवाई जाती है।बैंक नोट की संख्या चमकीली स्याही से मुद्रित की जाती है। बैंक नोट में चमकीले रेशे विद्यमान होते हैं जिसको अल्ट्रावायलेट रोशनी में ही देखा जा सकता है। नोट पर उभरी हुई छपाई के लिए स्याही स्वीस फर्म की यूनिट सिक्पा (एसआईसीपीए) में बनाई जाती ही जोकि सिक्किम में स्थित है। भारत में सबसे पहला वाटर मार्क वाला नोट 1861 में छपा था।


नोट कैसे छपते हैं----

सबसे पहले होशंगाबाद सिक्यॉरिटी पेपर मिल या विदेश से आई पेपर शीट को सायमंटन मशीन में डाला जाता है।इसके बाद इंटाब्यू नामक मशीन से पेपर को कलर किया जाता है और पेपर पर नोट की छपाई की जाती है।  इसके बाद अच्छे और खराब नोटों की अलग अलग छटाई की जाती है।  एक पेपर शीट में लगभग 32 से लेकर 48 तक  नोट होते हैं। खराब नोटों को पेपर शीट से निकालकर अलग कर लिया जाता है।

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फिर शीट पर छापे गए नोटों पर नंबर डाले जाते हैं। फिर शीट से नोटों को काटकर अलग के बाद एक-एक नोट की गहनता से जांच की जाती है। फिर इन्हें पैक कर दिया जाता है। पैकिंग करने  के बाद नोट के बंडलों को विशेष सुरक्षा के अंदर ट्रेन के द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक तक पहुंचाया जाता है।हर नोट में सुरक्षा की दृष्टि से मल्टी टोनल, थ्री-डी वाटरमार्क, माइक्रो लेटरिंग, सुरक्षा धागे जैसे कई तरह के सुरक्षा विकल्प डाले जाते हैं। नोट में सभी तरह के सुरक्षा विकल्प  मैसूर और होशंगाबाद प्रेस में ही लगाए जाते हैं।  हिन्दी और अंग्रेजी के अलावा हर नोट पर उसकी कीमत15 अन्य भारतीय भाषाओं में भी अंकित होती है।


रिजर्व बैंक के देशभर में 18 इश्यू ऑफिस हैं। ये अहमदाबाद, बेंगलुरू,बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना व थिरुवनंतपुरम में स्थित हैं। इसके अलावा एक सब-ऑफिस लखनऊ में है। प्रिंटिग प्रेस में छपे नोट सबसे पहले इन ऑफिसों में पहुंचते हैं। यहां से उन्हें कमर्शियल बैंक की शाखाओं को भेजा जाता है। - See more at: http://www.jagran.com/news/oddnews-do-you-know-how-to-make-rupee-14422114.html#sthash.JURF5hxJ.dpuf

रिजर्व बैंक के देशभर में 18 इश्यू ऑफिस हैं। ये अहमदाबाद, बेंगलुरू,बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना व थिरुवनंतपुरम में स्थित हैं। इसके अलावा एक सब-ऑफिस लखनऊ में है। प्रिंटिग प्रेस में छपे नोट सबसे पहले इन ऑफिसों में पहुंचते हैं। यहां से उन्हें कमर्शियल बैंक की शाखाओं को भेजा जाता है। - See more at: http://www.jagran.com/news/oddnews-do-you-know-how-to-make-rupee-14422114.html#sthash.JURF5hxJ.dpuf

छपे हुए नोट है ऐसे पहुंचते है बैंकों में

भारत में रिजर्व बैंक के 18 इश्यू ऑफिस स्थापित किये गए हैं। ये ऑफिस अहमदाबाद, बेंगलुरू, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना व तिरुवनंतपुरम में स्थित हैं।  इसके अलावा एक सब-ऑफिस लखनऊ में है। इन नोटों को अपने गंतव्य स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और पुलिस की होती है। प्रिंटिग प्रेस में नए तैयार नोटों को सबसे पहले इन ऑफिसों में पहुंचाया जाता है। यहाँ से उन नोटों को कमर्शियल बैंक की शाखाओं को भेजा जाता है।

रिजर्व बैंक के देशभर में 18 इश्यू ऑफिस हैं। ये अहमदाबाद, बेंगलुरू,बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना व थिरुवनंतपुरम में स्थित हैं। इसके अलावा एक सब-ऑफिस लखनऊ में है। प्रिंटिग प्रेस में छपे नोट सबसे पहले इन ऑफिसों में पहुंचते हैं। यहां से उन्हें कमर्शियल बैंक की शाखाओं को भेजा जाता है। - See more at: http://www.jagran.com/news/oddnews-do-you-know-how-to-make-rupee-14422114.html#sthash.JURF5hxJ.dpuf

नए नोटों का एटीएम में पहुंचना----

बैंको से नोटों को एटीएम में कैश वैन और हेलीकाप्टर आदि के माध्यम से पहुंचाया जाता है।  हमारे देश भारत में सात पंजीक्रत कैश लोजिस्टिक्स कंपनियां है और उनके पास 8800 कैश ले जाने वाली वैन उपलब्ध है। इन्ही कैश वैनों के माध्यम से बैंक से नोट अलग-अलग एटीएम मशीनों तक पंहुचाए जाते हैं। हर एटीएम में चार कैसेट विद्यमान होती है जिनमे अलग-अलग कीमत के नोट भरे जाते हैं। देश के कई दुर्गम इलाकों में नोटों को हेलिकॉप्टर या एयरक्राफ्ट से भी पहुंचाया जाता है। ऐसे सुदूरवर्ती और दुर्गम इलाकों में आमतौर पर एटीएम में छह दिन में एक ही बार पैसे डाले जाते हैं।

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नकली करेंसी और जाली नोटों का गिरोह जाल---नए नोटों की घोषणा से होगा चौपट 


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